Archive for the ‘ ThE PoEt…. ’ Category

ek KAvita…

कोई दिवाना केहेता हैं,
कोई पागल समजता हैं,
मगर धरती की बेचैनी,
को बस बदल समजता हैं.
मैं तुझसे दूर कैसा हुं,
तू मुझसे दूर कैसी हैं,
येह तेरा दिल समझता हैं,
या मेरा दिल समजता हैं.
की मोहब्बत ऐक एह्सासोन,
की पावन सी काहानी हैं,
कभी कबीरआ  दिवाना था,
कभी मीरा दिवानी हैं.
याहान सब लोग केहेते हैं,
मेरी आन्खोन में आसू हैं,
जो तू समझे तोह मोती हैं,
जो न समझे तोह पानी हैं.
के भ्रमर कोई कुमुद्नी पार,
मचल बैठा तोह हुंगामा,
हमारे दिल में कोई ख्वाब,
पल बैठा तोह हंगामा,
अभी तक डूब कर सुनते थे,
सब किस्सा मोहब्बत का,
मैं किस्से को हक़ीकत में,
बदल बैठा तोह हंगामा.
समंदर पीर का अंदर हैं,
लेकीन रो नाही सकता.
येह आंसू प्यार का मोती हैं इसको खो नाही सकता.
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सून ले,
मेरी चाहत को तू अपना बना लेना मगर सून ले,
जो मेरा हो नाही पाया वोह तेरा हो नाही सकता.

when she expressed herself to me….

क्या  खूब  कहा  हैं  आपने ,

आपके  खयालोन से  मुलाकात  होते  हि,

हमारा  पुनः  जन्म हो गया ….

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जीने  कि  आस  हि छोड  दि  थी  हमने ,

आपसे  मिलने  से  पेहेले ….

आपने  हमे   जीना  की  नई  राह  दिखा  दिया …

When i said i can Die for you,she replied….

Aap mujh par mar jaaoge,
par hum na mar sakenge.
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Aap mujh par mar jaaoge,
par hum na mar sakenge.
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par
aapki yaadon mein hum,
jite ji roz marte rahenge!

When she asked me whats on my mind….

Aapko Bhi nahi pata,

Mujhko bhi khabhar nahi,

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Aapko Bhi nahi pata,

Mujhko bhi khabhar nahi,

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Dono ek hi kashti ke sawaar hai,

Dono ko hi manzil ka Intezaar hai…